वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता से पहले कहा कि कोई ईरान के साथ समझौते को लेकर कोई दबाव नहीं है, हम सही डील का इंतजार कर रहे हैं। ईरान के साथ नया समझौता पूर्व में हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से कहीं बेहतर होगा और यह दुनिया के लिए एक सुरक्षा कवच सुनिश्चित करेगा। ट्रंप का बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका का एक उच्च-स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, ईरानी नेतृत्व के साथ दूसरे दौर की वार्ता शुरू करने के लिए पाकिस्तान रवाना हुआ है। दोनों देशों के बीच बुधवार को सीजफायर की समय सीमा खत्म हो रही है। इस महीने की शुरुआत में 21 घंटे तक चली लंबी चर्चा बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी।
पुराने समझौते से बेहतर होगा नया समझौता
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा और जो बाइडेन की आलोचना करते हुए JCPOA को अमेरिका के इतिहास का सबसे खराब समझौता बताया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पुराने समझौते ने ईरान के लिए परमाणु हथियार बनाने का रास्ता साफ किया। ट्रंप ने लिखा-"जो समझौता हम ईरान के साथ कर रहे हैं, वह JCPOA से कहीं बेहतर होगा। JCPOA को आमतौर पर 'ईरान परमाणु समझौता' कहा जाता है। इसे बराक हुसैन ओबामा और 'स्लीपी जो' बाइडेन ने तैयार किया था। यह हमारे देश की सुरक्षा से जुड़ा अब तक का सबसे खराब समझौता था। यह परमाणु हथियार हासिल करने का एक पक्का रास्ता था, जो हमारे द्वारा किए जा रहे समझौते के तहत न तो होगा और न ही हो सकता है।
1.7 अरब डॉलर की रकम विमान से ईरान भेजी गई थी
ट्रंप इस समझौते को लेकर आगे लिखा-"उन्होंने असल में 1.7 अरब डॉलर की रकम एक बोइंग 757 विमान से ईरान भेजी थी ताकि ईरानी नेतृत्व अपनी मर्ज़ी के अनुसार उसे खर्च कर सके। उन्होंने D.C., वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से सारी नकदी खाली कर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी सरकार यह डील खत्म नहीं करती, तो मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर परमाणु खतरा पैदा हो सकता था। ट्रंप ने भरोसा जताया कि नया समझौता “शांति, सुरक्षा और स्थिरता” सुनिश्चित करेगा।"

बातचीत ही आखिरी रास्ता
उन्होंने यह भी लिखा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में कोई समझौता होता है, तो वह इस बात की गारंटी देगा कि शांति, सुरक्षा और बचाव न केवल इज़राइल और मध्य-पूर्व के लिए, बल्कि यूरोप, अमेरिका और हर दूसरी जगह के लिए भी होगा। यह कुछ ऐसा होगा जिस पर पूरी दुनिया को गर्व होगा। उन्होंने यह भी लिखा कि बुधवार को युद्धविराम खत्म होने वाला है, ऐसे में इस्लामाबाद में हो रही बातचीत ही कूटनीति का आखिरी रास्ता है। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर डील नहीं हुई तो यह बड़े पैमाने पर युद्ध में तब्दील हो सकता है।
इस बीच, इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच रहा है। यहां ईरानी नेतृत्व के साथ दूसरे दौर की वार्ता होनी है। इससे पहले हुई 21 घंटे की लंबी वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुई थी। अब सीज़फायर की समय-सीमा समाप्त होने से पहले यह बातचीत आखिरी कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है। यदि वार्ता विफल होती है, तो क्षेत्र में बड़े टकराव की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप ने डेमोक्रेट्स और मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अमेरिका की मजबूत स्थिति को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव में आकर समझौता नहीं करेंगे और केवल अमेरिका के हित में सही डील ही स्वीकार करेंगे।